आईटी शेयरों में गिरावट के बीच सेंसेक्स ने दिखाई मजबूती
नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार में पिछले कई सत्रों से जारी गिरावट और बिकवाली के दौर के बाद गुरुवार को कारोबार की शुरुआत सकारात्मक रुख के साथ हुई। सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन निवेशकों के चेहरे पर मुस्कान तब लौटी जब शुरुआती मिनटों में ही सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांकों ने अच्छी बढ़त के साथ हरे निशान पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। सुबह सवा नौ बजे के आसपास बाजार में जबरदस्त उत्साह देखा गया और सेंसेक्स करीब साढ़े चार सौ अंकों की छलांग लगाकर 75,057 के पार निकल गया, जबकि निफ्टी ने भी 23,550 के मनोवैज्ञानिक स्तर को छूने का प्रयास किया।
बाजार की चाल और उतार-चढ़ाव का दौर
कारोबार की शुरुआत जितनी धमाकेदार रही, समय बीतने के साथ बाजार की चाल में उतनी ही अस्थिरता भी देखने को मिली। शुरुआती तेजी के बाद मुनाफावसूली का दबाव बढ़ा, जिसके कारण सूचकांक अपनी बढ़त को पूरी तरह बरकरार नहीं रख पाए और बढ़त का ग्राफ थोड़ा नीचे आया। सुबह दस बजे के बाद सेंसेक्स और निफ्टी में मामूली बढ़त ही रह गई, जो इस बात का संकेत है कि निवेशक अभी भी ऊंचे स्तरों पर सावधानी बरत रहे हैं और बाजार में खरीदारों व बिकवालों के बीच कड़ी टक्कर जारी है।
दिग्गज शेयरों का प्रदर्शन और क्षेत्रीय स्थिति
सेंसेक्स की शीर्ष तीस कंपनियों में से अधिकांश शेयर मजबूती के साथ कारोबार कर रहे हैं, जिनमें विशेष रूप से अदाणी पोर्ट्स, एशियन पेंट्स और ट्रेंट जैसे शेयरों ने निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिया। इसके विपरीत, तकनीकी क्षेत्र यानी आईटी शेयरों में सुस्ती का माहौल बना हुआ है जहाँ टीसीएस और इंफोसिस जैसी दिग्गज कंपनियाँ लाल निशान में कारोबार करती दिखीं। इसी बीच मुद्रा बाजार में कमजोरी दर्ज की गई और रुपया डॉलर के मुकाबले थोड़ा फिसलकर अपने नए स्तरों पर पहुँच गया, जिससे निर्यात आधारित कंपनियों पर असर दिखने की संभावना है।
वैश्विक कूटनीति और निवेशकों का भरोसा
बाजार में आई इस हरियाली के पीछे अमेरिका और चीन के बीच होने वाली उच्च स्तरीय शिखर वार्ता को एक बड़ा कारण माना जा रहा है। दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार और तकनीक को लेकर होने वाली चर्चा से वैश्विक बाजारों को स्थिरता मिलने की उम्मीद जगी है। साथ ही, घरेलू संस्थागत निवेशकों द्वारा की जा रही लगातार खरीदारी ने विदेशी निवेशकों की बिकवाली के प्रभाव को कम करने में मदद की है। विश्लेषकों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय संकेतों और अमेरिकी बाजारों में तकनीकी शेयरों में आई तेजी ने भारतीय निवेशकों के मनोबल को बढ़ाने का काम किया है।
तकनीकी दृष्टिकोण और भविष्य की राह
बाजार के जानकारों का कहना है कि वर्तमान तेजी वैश्विक इक्विटी में सुधार और घरेलू स्तर पर मजबूत बुनियादी ढांचों के कारण बनी हुई है। वॉल स्ट्रीट से मिल रहे सकारात्मक रुझानों ने स्थानीय बाजार को सहारा दिया है, भले ही मुद्रास्फीति के कुछ आंकड़ों ने चिंता पैदा की हो। आने वाले समय में बाजार की दिशा काफी हद तक विदेशी संस्थागत निवेशकों के रुख और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी। फिलहाल बाजार एक सीमित दायरे में रहकर अपनी मजबूती साबित करने की कोशिश कर रहा है जिससे लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर बन रहे हैं।

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