कर्नाटक में सियासी घमासान, डिप्टी CM का दिल्ली दौरा चर्चा में
नई दिल्ली/बेंगलुरु: कर्नाटक कांग्रेस में मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर मची खींचतान एक बार फिर सुर्खियों में है। राज्य के उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार इस समय दिल्ली के दौरे पर हैं, जहाँ उनकी बड़े नेताओं से मुलाकातों ने सियासी गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है।
"मैं क्या चर्चा कर रहा हूं, यह नहीं बताऊंगा"
जब मीडिया ने दिल्ली में शिवकुमार से उनके दौरों और मुलाकातों के एजेंडे पर सवाल किए, तो उन्होंने बेहद सख्त रुख अपनाया। उन्होंने दो टूक कहा:
"मैं यहाँ सिर्फ दिल्ली की हवा का मजा लेने नहीं आया हूँ। मैंने पार्टी नेताओं से मुलाकात की है और मैं अपना काम जारी रखूँगा। लेकिन मैं यह सार्वजनिक नहीं करूँगा कि मेरी किससे क्या बात हुई।"
जब उनसे राज्य में नेतृत्व परिवर्तन (CM बदलने) की संभावना पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने इसे गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए कहा कि वह मीडिया के सामने ऐसी गोपनीय बातों पर चर्चा नहीं कर सकते।
दिल्ली दौरे के मुख्य कारण
शिवकुमार ने अपने दिल्ली प्रवास के पीछे तीन प्रमुख वजहें बताई हैं:
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चुनावी फीडबैक: तमिलनाडु, केरल और असम में चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी निभाने के बाद, वे आलाकमान को जमीनी रिपोर्ट सौंपने आए हैं।
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प्रशासनिक कार्य: बेंगलुरु से जुड़े विकास कार्यों और अन्य मुद्दों पर वे केंद्रीय मंत्रियों से मिलेंगे। उन्होंने बताया कि शुक्रवार सुबह 11:45 बजे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उन्हें मुलाकात का समय दिया है।
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संगठनात्मक कर्तव्य: उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश अध्यक्ष और डिप्टी सीएम के नाते कर्नाटक में पार्टी को मजबूत करना उनका कर्तव्य है।
गुटबाजी की खबरों पर बेरुखी
राज्य में मुस्लिम समुदाय की नाराजगी और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के करीबी मंत्रियों की गुप्त बैठकों की खबरों पर शिवकुमार ने दूरी बनाए रखी। उन्होंने कहा:
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मुस्लिम विधायकों की नाराजगी: "हमें पार्टी स्तर पर कुछ सूचनाएं मिली हैं, हम सबको मिलकर काम करना होगा।"
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मंत्रियों की गुटबाजी: "मुझे नहीं पता कौन किसका करीबी है और मैं ऐसी किसी भी बैठक की परवाह नहीं करता।"
क्या होगा अगला कदम?
वरिष्ठ विधायकों द्वारा मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल के लिए दिल्ली कूच करने की खबरों पर उन्होंने रहस्यमयी अंदाज में बस इतना कहा, "चलिए, देखते हैं आगे क्या होता है।"
शिवकुमार के इस रुख से साफ है कि कर्नाटक कांग्रेस के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है और आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति में बड़े उलटफेर की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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