बंगाल में सियासी पारा हाई, अभिषेक की संपत्तियों को लेकर चर्चाएं तेज
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में बड़े राजनीतिक उलटफेर के बाद कोलकाता नगर निगम (केएमसी) के प्रशासनिक गलियारों में भारी हलचल देखी जा रही है। नगर निगम के आला अधिकारियों और इंजीनियरों की एक विशेष टीम तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी तथा उनके परिवार से जुड़ी संपत्तियों की सघन जांच में जुट गई है। अंदरूनी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस जांच को लेकर निगम मुख्यालय में पिछले एक सप्ताह से मैराथन कागजी कार्रवाई चल रही है, जिसके तहत रविवार को साप्ताहिक छुट्टी के दिन भी अधिकारियों ने रिकॉर्ड्स खंगालने का काम जारी रखा। इस पूरी प्रशासनिक कार्रवाई के केंद्र में 'लीप्स एंड बाउंड्स' नाम की एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी है, जिसका सीधा व्यावसायिक संबंध सांसद अभिषेक बनर्जी से बताया जाता है। निगम के इंजीनियरों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे प्रॉपर्टी रिकॉर्ड्स और टैक्स दस्तावेजों की बारीकी से स्क्रूटनी कर अभिषेक बनर्जी, उनके माता-पिता या उनकी इस निजी कंपनी के नाम दर्ज सभी चल-अचल संपत्तियों की सूची तैयार करें।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का बड़ा दावा, आमतला दफ्तर समेत 24 ठिकानों की सूची आई सामने
इस प्रशासनिक कवायद के बीच पश्चिम बंगाल के नवनियुक्त मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने एक जनसभा के दौरान इस मामले को लेकर बेहद सनसनीखेज दावा किया है। दक्षिण 24 परगना जिले के फाल्टा में आयोजित एक विशाल राजनैतिक रैली को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने जनता के सामने खुलासा किया कि उन्हें इस विवादित कंपनी और अभिषेक बनर्जी के साम्राज्य से जुड़ी दो दर्जन से अधिक गुप्त संपत्तियों का पूरा ब्यौरा हाथ लग चुका है। मुख्यमंत्री के अनुसार, उन्होंने कोलकाता नगर निगम के असेसमेंट विभाग से विशेष तौर पर फाइलें तलब की थीं, जिसके बाद उन्हें दक्षिण 24 परगना के आमतला स्थित इस कंपनी के एक बेहद आलीशान कॉर्पोरेट कार्यालय सहित कुल 24 संदिग्ध ठिकानों का पूरा विवरण मिल गया है। मुख्यमंत्री ने कड़े लहजे में स्पष्ट किया कि राज्य के सरकारी तंत्र का दुरुपयोग कर बनाई गई इन सभी अघोषित संपत्तियों की अब कानून के दायरे में बहुत जल्द एक व्यापक और निष्पक्ष जांच शुरू कराई जाएगी।
असेसमेंट से लेकर भवन निर्माण विभाग तक जांच तेज, नक्शों और अवैध निर्माण की हो रही पड़ताल
इस व्यापक जांच प्रक्रिया को धरातल पर उतारने के लिए कोलकाता नगर निगम के अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय के साथ काम शुरू हो गया है। रणनीति के तहत सबसे पहले नगर निगम के असेसमेंट (कर निर्धारण) विभाग ने अपने पुराने डिजिटल और भौतिक दस्तावेजों की री-चेकिंग की, जहां से अभिषेक बनर्जी और उनके करीबियों के नाम दर्ज संपत्तियों के सटीक पते, म्यूटेशन रिकॉर्ड और मकान नंबरों की एक सूची तैयार की गई। इसके तुरंत बाद इस पूरी सूची को आगे की कार्रवाई के लिए नगर निगम के भवन निर्माण (बिल्डिंग) विभाग को फॉरवर्ड कर दिया गया है। अब बिल्डिंग विभाग के विशेषज्ञ इंजीनियरों की टीम इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही है कि सूची में शामिल इन सभी बहुमंजिला इमारतों और दफ्तरों के निर्माण के समय केएमसी के सरकारी नियमों के तहत विधिवत नक्शा पास कराया गया था या नहीं, अथवा कहीं स्वीकृत नक्शे से अधिक अवैध निर्माण तो नहीं किया गया है।
शिक्षक भर्ती घोटाले से जुड़े होने का आरोप, अभिषेक बनर्जी ने दी राजनीतिक द्वेष की दलील
इस पूरी बड़ी प्रशासनिक हलचल और फाइलों को खंगालने की कवायद को लेकर हालांकि अभी तक कोलकाता नगर निगम या गृह विभाग की तरफ से कोई औपचारिक प्रेस विज्ञप्ति या आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि जांच के घेरे में आई निजी कंपनी 'लीप्स एंड बाउंड्स' पर पूर्ववर्ती शासनकाल में हुए कथित करोड़ों रुपये के प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाले के अवैध धन को सफेद करने (मनी लॉन्ड्रिंग) के गंभीर आरोप लग रहे हैं। दूसरी ओर, खुद पर और अपने परिवार पर हो रही इस चौतरफा कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए सांसद अभिषेक बनर्जी ने अपने ऊपर लगे सभी वित्तीय आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। टीएमसी सांसद का कहना है कि उनके खिलाफ की जा रही यह पूरी कानूनी और प्रशासनिक घेराबंदी पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित और द्वेष की भावना से की जा रही है ताकि उनके राजनीतिक प्रभाव को कमजोर किया जा सके। बहरहाल, निगम के विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी लगातार फाइलों और रिकॉर्ड्स को खंगालने में मुस्तैदी से जुटे हुए हैं।

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