लोकसभा में नारेबाजी करने के बाद ओम बिरला ने नियम में किया संशोधन
लोकसभा के कुछ सदस्यों द्वारा शपथ के दौरान नारेबाजी करने के बाद अध्यक्ष ओम बिरला ने नियम में संशोधन किया है, जिसके मुताबिक निर्वाचित सांसद सदन के सदस्य के रूप में शपथ लेते समय कोई भी अतिरिक्त टिप्पणी नहीं कर सकते।ओम बिरला ने सदन के कामकाज से संबंधित कुछ मामलों को विनियमित करने के लिए अध्यक्ष के निर्देशों में 'निर्देश-1' में एक नया खंड जोड़ा है, जो नियमों का हिस्सा नहीं था। निर्देश-1 में संशोधन के अनुसार, नया खंड-तीन अब यह कहता है कि एक सदस्य जब शपथ लेगा और उस पर हस्ताक्षर करेगा तो वह उपसर्ग या प्रत्यय के रूप में किसी भी शब्द का उपयोग या अभिव्यक्ति नहीं करेगा। यानी कोई टिप्पणी नहीं करेगा।
यह संशोधन पिछले सप्ताह शपथ लेते समय कई सदस्यों द्वारा 'जय संविधान' और 'जय हिंदू राष्ट्र' जैसे नारे लगाने की पृष्ठभूमि में आया है। एक सदस्य ने 'जय फलस्तीन' का नारा भी लगाया था, जिस पर भी कई सदस्यों ने आपत्ति भी जताई थी।लोकसभा अध्यक्ष ने सदस्यों से शपथ लेते समय निर्धारित प्रारूप पर कायम रहने का अनुरोध किया था, लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने आरोप लगाया था कि कई सदस्यों ने शपथ लेने या प्रतिज्ञान करने के महत्वपूर्ण अवसर का इस्तेमाल राजनीतिक संदेश भेजने के लिए किया।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि 18वीं लोकसभा के पहले सत्र में 103 प्रतिशत कामकाज हुआ। बिरला ने बताया कि सत्र के दौरान कुल सात बैठकें हुईं और सदन करीब 34 घंटे तक चला। सत्र के दौरान 539 नवनिर्वाचित सदस्यों ने शपथ ली। इसके अलावा पहले सत्र में ओम बिरला का दोबारा स्पीकर के रूप में चुनाव हुआ और राष्ट्रपति का अभिभाषण भी हुआ। मंगलवार को लोकसभा को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया।
ओम बिरला ने यह भी बताया कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में 68 सदस्यों ने भाग लिया। 26 जून को हुए लोकसभा अध्यक्ष के चुनाव का जिक्र करते हुए बिरला ने ध्वनिमत से दूसरी बार उन्हें अध्यक्ष चुने जाने पर आभार व्यक्त किया। स्पीकर ने बताया कि 26 जून को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंत्रिपरिषद का सदन में परिचय कराया।

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