साइबर अपराधियों की नई चाल, AI आवाज और प्रोफाइल फोटो से ठगी
जयपुर। आज के डिजिटल युग में साइबर अपराधी ठगी के लिए सामान्य तरीकों को छोड़कर अब बेहद उन्नत और तकनीकी रूप से सटीक रास्तों का इस्तेमाल कर रहे हैं। पुलिस की जांच में सामने आया है कि ये अपराधी किसी भी वारदात को अंजाम देने से पहले संबंधित संस्थान की वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे LinkedIn और Facebook से कर्मचारियों और प्रोजेक्ट्स की पूरी जानकारी जुटाते हैं। यहाँ तक कि विभागीय WhatsApp ग्रुप्स में सेंध लगाकर वे आपसी बातचीत और अधिकारियों के पदक्रम को भी समझ लेते हैं, ताकि उनकी ठगी पूरी तरह असली लगे।
ठगी के आधुनिक पैंतरे
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फेक प्रोफाइल और डीपफेक: अपराधी वरिष्ठ अधिकारियों की फोटो लगाकर फर्जी WhatsApp अकाउंट बनाते हैं। अब AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के जरिए 'डीपफेक वॉइस' का इस्तेमाल कर बड़े अधिकारियों की हूबहू आवाज में कॉल की जाती है, जिससे कर्मचारी धोखा खा जाते हैं।
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स्पूफ़्ड ईमेल: ठग ऐसे ईमेल भेजते हैं जो दिखने में बिल्कुल आधिकारिक ईमेल एड्रेस जैसे होते हैं, लेकिन उनमें बहुत सूक्ष्म बदलाव होता है।
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इमरजेंसी का झांसा: अक्सर मेडिकल इमरजेंसी या किसी बड़े प्रोजेक्ट की तत्काल आवश्यकता बताकर गिफ्ट वाउचर या ऑनलाइन फंड ट्रांसफर करने का दबाव बनाया जाता है।
सुरक्षा के लिए जरूरी सावधानियां
राजस्थान पुलिस ने आमजन और कर्मचारियों के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
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पुष्टि अनिवार्य है: यदि किसी अनजान नंबर से आपके बॉस या वरिष्ठ अधिकारी के नाम पर मैसेज आए, तो तुरंत उनके पुराने और आधिकारिक नंबर पर कॉल करके सच्चाई जानें।
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फोटो पर भरोसा न करें: इंटरनेट पर किसी की भी फोटो आसानी से उपलब्ध है, इसलिए केवल प्रोफाइल पिक्चर देखकर पैसे न भेजें।
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जल्दबाजी से बचें: अपराधी आपको डराकर या जल्दबाजी दिखाकर सोचने का समय नहीं देना चाहते। ऐसे में शांत रहें और अपने सहयोगियों से चर्चा करें।
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गोपनीयता: अपना ओटीपी (OTP), बैंक पासवर्ड या कोई भी व्यक्तिगत जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
यहाँ दर्ज कराएं अपनी शिकायत
यदि आप किसी भी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी का शिकार होते हैं, तो बिना देर किए इन माध्यमों का उपयोग करें:
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साइबर हेल्पलाइन: 1930 (तत्काल कॉल करें)
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विशेष हेल्पडेस्क नंबर: 9256001930 और 9257510100
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ऑनलाइन पोर्टल: अपनी शिकायत www.cybercrime.gov.in पर दर्ज करा सकते हैं।

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