नागौर। जिले के रियांबड़ी क्षेत्र से एक विचलित करने वाली घटना सामने आई है, जहाँ शिक्षा के मंदिर को श्रम का केंद्र बना दिया गया। दासावास गांव के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में मिड-डे मील के दौरान बच्चों से बर्तन उठवाने और शिक्षकों की लापरवाही का गंभीर मामला उजागर हुआ है।

विद्यालय का हाल: बच्चे काम पर, शिक्षक आराम पर

विद्यालय में जब भोजन का समय हुआ, तब कक्षा-कक्ष के भीतर का नजारा हैरान करने वाला था। एक तरफ चार शिक्षक आराम से सोते पाए गए, वहीं दूसरी ओर मासूम बच्चे भारी स्टील के बर्तनों का बोझ उठाकर यहां-वहां ले जा रहे थे। इस दौरान विद्यालय के प्रधानाध्यापक सोहनलाल फड़ौदा वहां मौजूद थे, लेकिन उन्होंने बच्चों को रोकने के बजाय चुप्पी साधे रखी। बच्चों के अनुसार, यह कोई एक दिन की बात नहीं है बल्कि उनसे यह कार्य रोजाना करवाया जाता है।

प्रधानाध्यापक का विवादित बयान

जब इस अव्यवस्था पर प्रधानाध्यापक से जवाब मांगा गया, तो उन्होंने जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय बेहद संवेदनहीन तर्क दिया। उन्होंने कहा कि "बच्चों के बर्तन तो बच्चे ही उठाएंगे, शिक्षक नहीं।" उन्होंने कटाक्ष करते हुए यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वे शिक्षकों द्वारा बर्तन उठाने का आदेश भी निकाल देंगे। उनके इस गैर-जिम्मेदाराना बयान ने मामले को और तूल दे दिया है।

प्रशासन की आगामी कार्रवाई

इस घटना के सामने आने के बाद प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है:

  • एसडीएम (SDM): सूर्यकांत शर्मा ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि शिकायत प्राप्त हुई है और इसकी गहन जांच करवाई जाएगी। दोषी पाए जाने पर शिक्षकों के विरुद्ध सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

  • बाल कल्याण समिति: नागौर बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष मनोज सोनी ने भी मामले पर संज्ञान लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि रिपोर्ट के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी और इस विषय को जिला स्तरीय बैठक में भी उठाया जाएगा।