एपस्टीन केस में नया मोड़, मस्जिद निर्माण और विदेशी कनेक्शन का दावा
वाशिंगटन | दिवंगत अमेरिकी फाइनेंसर और यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन के बारे में सामने आए नए दस्तावेजों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सनसनी मचा दी है। अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, एपस्टीन मध्य पूर्व के देशों में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का सलाहकार बनना चाहता था। अपनी इस महात्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए उसने न केवल प्रभावशाली लोगों से कूटनीतिक संबंध बनाए, बल्कि खुद को इस्लामी कला और संस्कृति के प्रति बेहद समर्पित दिखाने का प्रयास भी किया। दस्तावेजों से पता चलता है कि वह सऊदी अरब के बड़े आर्थिक प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बनने की फिराक में था और इसके लिए उसने कई वर्षों तक जमीन तैयार की थी।
निजी द्वीप पर बनाई 'नकली मस्जिद': काबा के पवित्र 'किस्वा' का भी किया इस्तेमाल
रिपोर्ट में सबसे हैरान करने वाला खुलासा एपस्टीन के निजी कैरेबियाई द्वीप 'लिटिल सेंट जेम्स' को लेकर हुआ है। एपस्टीन ने वहां एक अनोखी इमारत बनवाई थी, जिसे वह खुद 'मस्जिद' कहता था। इस इमारत को सजाने के लिए उसने मक्का के पवित्र काबा के 'किस्वा' (कुरान की आयतों वाले रेशमी कपड़े) के हिस्से, उज्बेकिस्तान की प्राचीन टाइल्स और सीरियाई वास्तुकला से प्रेरित सोने का गुंबद जैसी दुर्लभ धार्मिक वस्तुओं का संग्रह किया था। हालांकि, जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि यह इमारत किसी धार्मिक उद्देश्य के लिए नहीं बल्कि एक आर्ट प्रोजेक्ट के रूप में बनाई गई थी, जिसका उपयोग वह अरब देशों के सहयोगियों को प्रभावित करने के लिए करता था। साल 2017 में आए भीषण तूफान 'मारिया' के बाद इस ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा, जिसके साथ ही एपस्टीन के अंतरराष्ट्रीय संपर्कों का यह मायाजाल भी बिखरने लगा।

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