तीर्थों में भोजन व्यवस्था ठप, गैस संकट से श्रद्धालु परेशान
उदयपुर। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण गैस सप्लाई प्रभावित हुई है, जिसका असर अब मंदिरों की रसोई तक पहुंच गया है। कई जगह भोजनशालाएं बंद हैं।सबसे ज्यादा असर नाकोड़ा जैन तीर्थ, पावापुरी जैन तीर्थ, जीरावाला पार्श्वनाथ जैन तीर्थ, हाथीपोल जैन धर्मशाला और चौगान जैन मंदिर की भोजनशालाओं पर पड़ा है।
12 मार्च से बंद चौगान जैन मंदिर की भोजनशाला
उदयपुर में दो प्रमुख भोजनशालाएं बंद हैं। श्री जैन श्वेताम्बर महासभा के महामंत्री कुलदीप नाहर के अनुसार, उदयपुर के हाथीपोल स्थित सबसे पुरानी जैन धर्मशाला की भोजनशाला पिछले 15 दिनों से बंद है। यहां रोजाना करीब 100 श्रद्धालुओं के लिए भोजन बनता था। इसी तरह शिक्षा मंदिर चौराहा स्थित चौगान जैन मंदिर की भोजनशाला भी 12 मार्च से बंद है, जहां प्रतिदिन 150 से अधिक लोग भोजन करते थे।
नाकोड़ा में मेन्यू में बदलाव
नाकोड़ा जैन तीर्थ में भोजनशाला पूरी तरह बंद नहीं की गई है, लेकिन गैस की कमी के चलते कई बदलाव किए गए हैं। यहां अब सिलिंडर की जगह लकड़ी से भोजन तैयार किया जा रहा है। पहले परोसी जाने वाली ताजा नमकीन की जगह सूखे खाद्य पदार्थ शामिल कर दिए गए हैं। इस तीर्थ में रोजाना करीब 1500 और वीकेंड पर 2500 तक श्रद्धालु पहुंचते हैं।
श्रद्धालुओं को हो रही परेशानी
भोजन-प्रसाद नहीं मिलने से दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई लोग बिना भोजन किए ही वापस लौटने को मजबूर हैं। खासतौर पर बुजुर्ग और परिवार के साथ आए यात्रियों को अधिक दिक्कत हो रही है।
प्रमुख तीर्थों पर श्रद्धालुओं की संख्या (प्रतिदिन/वीकेंड)
- नाकोड़ा (बालोतरा): 1500 / 2500
- पावापुरी (सिरोही): 500 / 1000
- जीरावाला (सिरोही): 500 / 1000
- हाथीपोल (उदयपुर): 100 / 150
- चौगान जैन मंदिर (उदयपुर): 100 / 150
प्रबंधन की कोशिशें जारी
मंदिर ट्रस्ट और प्रबंधन समितियां भोजनशालाओं को चालू रखने के प्रयास में जुटी हैं, लेकिन गैस सप्लाई सामान्य होने तक स्थिति में सुधार की उम्मीद कम है। फिलहाल वैकल्पिक व्यवस्थाओं के जरिए श्रद्धालुओं को राहत देने की कोशिश की जा रही है।

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