एंटीबायोटिक फेल होने के बाद भी बाजार में उपलब्ध, लापरवाही उजागर
जयपुर। पहले कफ सिरप और अब एंटीबायोटिक दवा- राजस्थान में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर एक के बाद एक सामने आ रहे मामलों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ताजा मामले में भरतपुर से लिया गया एंटीबायोटिक का सैंपल जांच में फेल मिला, जिसके बाद ड्रग विभाग ने प्रदेशभर में छापेमारी कर कार्रवाई शुरू की है। राजस्थान में फेल एंटीबायोटिक दवा का मामला सामने आने के बाद अब ड्रग मॉनिटरिंग सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भरतपुर से लिए गए सैंपल की रिपोर्ट करीब 60 दिन बाद आई, तब तक संदिग्ध बैच की दवाएं बाजार में बिक चुकी थीं।
क्यूसी पॉट-200 पूरी तरह फेल
जांच में क्यूसी पॉट-200 (सेफपोडोक्साइम प्रॉक्सेटिल) एंटीबायोटिक पूरी तरह फेल पाई गई। इसके बाद ड्रग विभाग ने जयपुर, जालोर और भरतपुर में छापेमारी कर करीब 4 लाख रुपए की दवाएं जब्त कीं और नए सैंपल जांच के लिए भेजे।
ये कंपनी बनाती है 500 से ज्यादा दवा
चौंकाने वाली बात यह है कि दवा बनाने वाली कंपनी 500 से ज्यादा प्रकार की दवाएं तैयार करती है। ऐसे में अब आशंका बढ़ गई है कि अन्य दवाओं की गुणवत्ता भी संदेह के घेरे में हो सकती है। विभाग ने अलग-अलग बैच के नमूने लेकर जांच शुरू कर दी है, वहीं सप्लाई चेन की पड़ताल के लिए टीमें हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड भेजी जा रही हैं। इस पूरे मामले ने दवा जांच प्रक्रिया की धीमी गति और निगरानी तंत्र की कमजोरी को उजागर कर दिया है, जिससे मरीजों की सुरक्षा पर भी बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।

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