उदयपुर। भाजपा सांसद डॉ मन्नालाल रावत और आईएएस दंपती अंजलि राजोरिया और अंकित कुमार सिंह के बीच टकराव थमने की बजाय और गहराता जा रहा है। राज्य सरकार ने राज्य सरकार ने दोनों अधिकारियों का तबादला कर इस विवाद को शांत करने की कोशिश की, लेकिन सांसद रावत ने साफ कर दिया है कि तबादले से मामला खत्म नहीं होता। 

सांसद मन्नालाल रावत ने लगाए गंभीर आरोप

अब वे अंजलि राजोरिया के खिलाफ संसद में विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहे हैं और इस सिलसिले में विशेषज्ञों से कानूनी राय भी ले चुके हैं। सांसद रावत का मुख्य आरोप यह है कि प्रतापगढ़ कलेक्टर के पद पर रहते हुए अंजलि राजोरिया ने जिला खनिज फाउंडेशन यानी DMF के तहत सरकार द्वारा वित्तीय रूप से स्वीकृत 54 विकास कार्यों में से महज तीन को ही आगे बढ़ाया। बाकी 51 कार्य ठंडे बस्ते में डाल दिए गए। 

पुराना टकराव बना वजह

रावत का कहना है कि यह निर्णय किसी प्रशासनिक ज़रूरत के तहत नहीं बल्कि व्यक्तिगत अहंकार और दंभ के चलते लिया गया, जिसकी सीधी मार क्षेत्र के विकास पर पड़ी।27 मार्च को संसद में यह मुद्दा उठाते हुए सांसद रावत ने कहा था कि कलेक्टर के इस रवैये से प्रधानमंत्री के विकास विजन को ठेस पहुंची है। उन्होंने डीएमएफ की अध्यक्षता लोकसभा सांसदों को सौंपने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग भी रखी।यह विवाद सिर्फ एक अधिकारी तक सीमित नहीं है। सांसद रावत का अंजलि राजोरिया के पति और तत्कालीन डूंगरपुर कलेक्टर अंकित कुमार सिंह से भी पुराना टकराव है।

साल 2025 में हुई थी नोकझोंक

दिसंबर 2025 में डूंगरपुर की दिशा समिति की बैठक में सांसद रावत और विधायक राजकुमार रोत के बीच तीखी नोकझोंक हुई थी। रावत का आरोप है कि उस मौके पर अंकित कुमार सिंह ने स्थिति संभालने की बजाय मूकदर्शक बने रहे। इस मामले की शिकायत उन्होंने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव तक पहुंचाई थी।1 अप्रैल को जारी तबादला सूची में अंजलि राजोरिया को प्रतापगढ़ कलेक्टर पद से हटाकर गृह विभाग में संयुक्त सचिव बनाया गया, जबकि अंकित कुमार सिंह को डूंगरपुर से फलोदी कलेक्टर के रूप में तैनात किया गया। बावजूद इसके सांसद रावत ने स्पष्ट किया कि अभी वेट एंड वॉच की स्थिति है और जनता के हितों से जुड़े मुद्दों पर वे आगे भी कदम उठाने से नहीं हिचकेंगे। यह पूरा मामला राजनीति और प्रशासन के बीच बढ़ते टकराव की एक बड़ी और चिंताजनक तस्वीर पेश कर रहा है।