जंगल छोड़कर भाग रहे नक्सली, बालाघाट के ठिकानों से भारी मात्रा में नक्सली डंप बरामद
बालाघाट: नक्सलवाद के पूरी तरह से खात्मे के निर्धारित लक्ष्य के मद्देनजर बालाघाट पुलिस ने नक्सल विरोधी अभियान को गतिशीलता के साथ-साथ और प्रभावी बनाया है. सुरक्षाबलों के संयुक्त सर्चिंग अभियान में रविवार को बालाघाट के जंगलों में अलग-अलग दो जगहों से नक्सली साहित्य, विस्फोटक, कम्युनिकेशन डिवाइस, दवाइयां, अनाज और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुएं बरामद की गई हैं.
हाॅकफोर्स, सीआरपीएफ, कोबरा, जिला पुलिस तथा बीडीडीएस की टीमों का सघन सर्चिंग अभियान
नक्सल प्रभावित इलाकों में संयुक्त सुरक्षा बलों की भारी संख्या में तैनाती की गई है. जिसमें हाॅकफोर्स, सीआरपीएफ, कोबरा, जिला पुलिस तथा बीडीडीएस की टीमों को सघन सर्चिंग के लिए जंगलों में उतार दिया गया है. जवानों द्वारा संयुक्त रूप से अभियान चलाया जा रहा है. बीडीडीएस और डाॅग स्क्वायड की टीम द्वारा नक्सल डंप, विस्फोटक सामग्री और खतरनाक उपकरणों की भी तलाश जारी है.
सिरका-मोजाडेरा एवं अलीटोला के जंगलों से जमीन से खोदकर नक्सली डंप निकाला गया
रविवार को फिर संयुक्त सर्चिंग के दौरान दो अलग-अलग जगहों से बड़ी मात्रा में नक्सल डंप बरामद किये गए हैं. किरनापुर थानांतर्गत सिरका-मोजाडेरा एवं अलीटोला के जंगलों में नक्सलियों द्वारा छुपाए गए डंप को जमीन से खोदकर निकाला गया है. इस दौरान विस्फोटक पदार्थ, कारतूस, कम्युनिकेशन डिवाइस, दर्द निवारक इंजेक्शन, ओआरएस, विटामिन सप्लीमेंट, अनाज और दैनिक उपयोग की कई अन्य वस्तुएं पाई गई हैं. बताया जाता है कि नक्सली इस तरह के डंप जंगल में जमीन के अंदर गाड़ कर रखते हैं, ताकि समय आने पर उनका उपयोग किया जा सके.
मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के सुरक्षा बलों द्वारा चलाया जा रहा है संयुक्त अभियान
बता दें जिस तरह से सुरक्षा बलों ने संयुक्त ऑपरेशन चलाया है, उसके बाद से नक्सलियों पर काफी दबाव बना है. नक्सली इसी दबाव के चलते अपने ठिकानों को छोड़ने पर मजबूर हो गए हैं. जिस तरह से मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के सुरक्षा बलों द्वारा संयुक्त अभियान चलाया जा रहा है, उसके बाद से नक्सलियों में भय व्याप्त है. और शायद यही वजह कि अब वे समर्पण नीति का रूख करने लगे हैं.
बहरहाल जिस तरह संयुक्त रूप से सुरक्षा बलों ने अभियान को जारी रखा है, उससे कहा जा सकता है कि बीते चार दशकों के लाल आंतक का दंश झेल रहे जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों के भोले-भाले लोगों को जल्द ही इस समस्या से निजात मिल जाएगी.

वर्तमान समय जनजातीय समाज के विकास का अभूतपूर्व काल- राज्यपाल पटेल
धर्म नगरी वाराणसी में 3 से 5 अप्रैल तक होगा महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य का ऐतिहासिक मंचन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
CISF Constable Recruitment Dispute: Supreme Court Dismisses Central Government's Petition
नई शराब नीति: पारदर्शी लाइसेंसिंग से बढ़ी प्रतिस्पर्धा और राजस्व
लोकसभा सीटों में इजाफा बना बहस का मुद्दा, उत्तर को लाभ तो दक्षिण को नुकसान?